झूंसी के छतनाग गांव में गंगा तट को बनाया कब्रिस्तान
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झूंसी के छतनाग गांव स्थित श्मशान घाट पर बेखौफ तरीके से रेती में शव भी दफनाए जा रहे थे। लोग मनमाने तरीके से मां गंगा को बुरी तरह प्रदूषित करने में जुटे हुए थे। छतनाग श्मशान घाट पर झूंसी के अलावां जौनपुर, प्रतापगढ़, हंडिया, गोपीगंज, ज्ञानपुर, बरौत, बादशाहपुर समेत कई शहरों से लोग शवों का अंतिम संस्कार करने आते हैं। घाट के किनारे शव को जलाने के लिए लकड़ियों की भी कई टाल हैं। इसके बावजूद कोरोना के बढ़ते संक्रमण और लोगों की भारी संख्या में हुई मौत के दौरान चंद पैसे बचाने के लिए लोग मां गंगा को प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। घाट पर मां गंगा की अविरल धारा से महज दो सौ मीटर दूर पर ही तकरीबन एक किलोमीटर की एरिया में सौ से ज्यादा लाशें बेखौफ दफनाई गई हैं।
इससे छतनाग गांव समेत आसपास के लोग हतप्रभ हैं। रविवार को इससे जुड़ी खबर अमर उजाला में झूंसी में रेती में दफना दिए सैकड़ों शव शीर्षक से प्रकाशित हुई तो हड़कंप मच गया। पूरे मामले को प्रशासन और पुलिस के आला अफसरों ने तत्काल संज्ञान में लिया। तकरीबन आठ बजे सुबह इंसपेक्टर झूंसी शमशेर बहादुर सिंह पुलिस फोर्स के साथ श्मशान घाट पहुंचे तथा रेती में गाड़े गए शवों को देखा। पुलिस भी भारी संख्या में रेती में गाड़े गए शवों को देख सन्न रह गई। तत्काल घाटियों और लकड़ी बेचने वालों को बुलाकर ताकीद किया गया कि आगे से कोई भी शव दफनाने आता है तो उसे रोक दें। फिर भी न माने तो पुलिस को सूचना दें। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
prayagraj news : झूंसी के छतनाग घाट पर सैकड़ों की संख्या में दफनाए गए शव।
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