करमा। खड़ेसर नाला की सफाई नहीं होने से पानी में सड़ कर नष्ट हो गया धान की फसल। महीनों बाद पानी
खड़ेसर नाले की सफाई नहीं होने से पंवर, कांटी और बुदावा गांव के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इससे सैकड़ों बीघा धान की फसल जलमग्न हो गई है। खेतों में अब भी पानी भरा होने से फसल बर्बाद होने की स्थिति में है। किसान निसार अहमद, लालजी कुशवाहा, कैसर सिद्दीकी, फूलचंद पटेल, राजनाथ बिंद, भैरव कुशवाहा, दरबारी लाल आदि ने नष्ट हुई फसल का उचित मुआवजा देने और नाले की तत्काल सफाई कराने की मांग की है।
बृहस्पतिवार को विधायक बारा वाचस्पति ने प्रभावित गांवों का दौरा कर किसानों से फसल नुकसान की जानकारी ली। उन्होंने किसानों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया। साथ ही नष्ट हुई फसल का उचित मुआवजा दिलाने के लिए सरकार के स्तर पर पहल करने की बात कही। एक्सईएन बाघला नहर पीके सिंह ने बताया कि इस संबंध में जेई से जानकारी ली जाएगी। नाला सफाई के लिए प्रयास किया जाएगा।
इधर, मेजा में पानी निकासी की व्यवस्था न होने से 47 दिन बाद भी अमिलिया कला नहवाई में 64 एकड़ धान की फसल डूबी है। अब पानी में कमलगट्टा उग आया है। किसानों का कहना है अगर, पानी निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो गेहूं की बुवाई भी प्रभावित होगी।
पीड़ित किसान संगम लाल शुक्ल, अशोक शुक्ला और सोवालाल भारतीया ने बताया कि शिकायत के बाद भी डूबी धान की फसल से पानी नहीं निकाला जा सका। किसानों ने बताया कि इसी तरह से पानी डूबा रहेगा तो गेहूं की बोआई भी प्रभावित होगी।