इसी क्रम में निदेशालय ने आगरा के उच्च शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी करते हुए इन्हीं बिंदुओं पर आख्या मांग ली, लेकिन क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई करने की बजाय निदेशालय से पुस्तकालय अध्यक्ष के वेतन से वसूली संबंधी दिशा-निर्देश मांग लिए। उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. ब्रह्मदेव की ओर से शासन को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, आगरा की ओर से निदेशालय के दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया।
पत्र के माध्यम से शासन को यह भी बताया गया है कि अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत पुस्तकालय अध्यक्षों की सेवा संंबंधी शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। निदेशक ने इस मामले में शासन से दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया है। निदेशालय ने कुछ दिनों पहले सभी उच्च शिक्षा अधिकारियों से आख्या मांगी थी कि ऐसे कितने कॉलेज हैं, जहां पुस्तकालय विज्ञान की पढ़ाई नहीं होती हैं, लेकिन वहां पुस्तकालय अध्यक्ष 60 वर्ष की आयु के बाद भी नौकरी कर रहे हैं।
उच्च शिक्षा अधिकारियों को ओर से भेजी गई आख्या के अनुसार प्रदेश में ऐसे 17 पुस्तकालय अध्यक्ष चिह्नित किए गए हैं। आगरा का मामला सामने आने के बाद अब सभी संबंधित उच्च शिक्षा अधिकारियों से भी पूछा जा सकता है कि सेवानिवृत्ति की आयु पूरी करने के बाद भी पुस्तकालय अध्यक्ष नौकरी कैसे कर रहे हैं और इन मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई।