इलाहाबाद (ब्यूरो)। प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को सप्ताह के हर बुधवार को अनिवार्य रूप से दूध पिलाने की योजना पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जानकारी मांगी है। कन्वर्जन कास्ट काफी कम होने के बाबत कोर्ट ने पूछा है कि इतने कम पैसों में कैसे सभी बच्चों को दूध पिलाया जाएगा। इतना दूध कहां से आएगा। सरकार की क्या योजना है। शाहजहांपुर के गुरु नानक पाठशाला कन्या जूनियर हाईस्कूल की याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने सुनवाई की। याचिका पर छह अगस्त को अगली सुनवाई होगी।
याची के वकील प्रभाकर अवस्थी के मुताबिक अदालत ने जानना चाहा है कि एक दिन में इतना दूध कहां से आएगा कि लाखों बच्चों को एक साथ पिलाया जा सके। सरकार अपनी योजना का खुलासा करे। याचिका में कहा गया है कि प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में दूध पिलाने की योजना तो लागू कर दी गई, मगर उसके लिए अलग से कोई बजट नहीं दिया गया है। दूध का प्रबंध मिड डे मील के लिए मिलने वाली कन्वर्जन कास्ट से ही करना जो काफी कम है। इतने कम रुपयों में हर सप्ताह बच्चों के लिए दूध का इंतजाम करना मुमकिन नहीं है।