इलाहाबाद। संगम नोज पर लहराते विविध प्रकार के झंडे और इन झंडों के नीचे बैठे एजीयूपी, पुलिस एवं प्रशासन के पंडे, जिन्हें देखने के बाद सबके मन में यही सवाल उठता है कि मामला क्या है? क्या एजी ऑफिस, पुलिस और प्रशासन ने अपने-अपने विभागों के पंडे वहां नियुक्त कर दिए हैं या पंडे इन विभागों के कर्मचारी भी हैं? पंडों का दावा है कि वह किसी विभाग के कर्मचारी नहीं हैं लेकिन संबंधित विभागों के कर्मचारी या अफसर संगम क्षेत्र में आते हैं तो पूजा-पाठ उन्हीं से कराते हैं। हालांकि विभागों की तरफ से उन्हें इस कार्य के लिए अधिकृत नहीं किया गया है और न ही बाबत कोई दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
झंडे इसीलिए लगाए जाते हैं ताकि संगम क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालु अपने पंडे तक आसानी से पहुंच सकें। संगम नोज पर पुलिस वाच टावर के ठीक बगल में सबसे पहला तख्त लगाकर बैठे वीरेंद्र शुक्ला ने एजीयूपी का झंडा लगा रखा है। सफेद, हरे और लाल रंग के इस झंडे में ‘एजीयूपी’ लिखा हुआ है।
पूछने पर बताते हैं कि वह चौथी पीढ़ी के रूप में एजीयूपी का झंडा लगाकर बैठ रहे हैं। वर्ष 2001 से पहले एजीयूपी ब्रदहहुड के बैनर तेल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी निशान लेकर उनके पिता पंडित विश्वंभर नाथ शुक्ला के पास आया करते थे और एजीयूपी का एक झंडा सौंप देते थे, जो साल भर संगम क्षेत्र में लहराता रहता था। वीरेंद्र को अपने पिता का यह कथन कभी नहीं भूलता कि ‘प्रशासन मेले का मालिक होता है, पुलिस व्यवस्था देखती है और एजीयूपी यानी एजी ऑफिस इन दोनों का लेखाजोखा रखता है।’ बकौल वीरेंद्र कर्मचारियों में मतभेद के कारण 2001 के बाद एजीयूपी का झंडा आना बंद हो गया। तीन साल पहले उनके पिता भी गुजर गए। हालांकि एजी ऑफिस के कर्मचारी अब भी उनके पास आते हैं।
वीरेंद्र के बगल में राजेंद्र प्रसार मिश्र का तख्त है, जिनका दावा है वह प्रशासन के पंडे हैं और प्रशासन ने उन्हें नीले रंग का झंडा देख रखा है। राजेंद्र की मानें तो प्रशासन के अफसर और संगम क्षेत्र में आने वाले तमाम वीआईपी पूजा-पाठ के लिए उनके पास आते हैं। भले ही उन्हें प्रशासन की तरफ से अधिकृत न किया गया हो लेकिन वीरेंद्र को इस बात का गर्व है कि मेले का मालिक प्रशासन होता है और वे प्रशासनिक प्रतिनिधियों को पूजा-पाठ करवाते हैं। उनके ठीक बगल में राजन मिश्र का तख्त है और वहां लाल एवं नीले रंग का झंडा लहराता रहता है, जो पुलिस के झंडे से काफी मिलता है। राजन पुलिस कर्मियों को पूजा-पाठ करवाते हैं।