नैनी में आयुर्वेदिक उत्पाद बनाने वाली एक प्रतिष्ठित कंपनी का गृहकर कम करना नगर निगम के टैक्स इंस्पेक्टर राज नारायण और लिपिक ज्ञानेंद्र द्विवेदी को महंगा पड़ गया। सोमवार को नगर आयुक्त देवेंद्र कुमार पांडेय ने दोनों को निलंबित कर दिया। इस मामले में अभी और कई कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।
नैनी मिर्जापुर रोड पर स्थित आयुर्वेदिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी से 27 लाख 27 हजार 552 रुपये वार्षिक मूल्यांकन के आधार पर 11 प्रतिशत के हिसाब से तीन लाख रुपये टैक्स लिया जा रहा है। काफी बड़े क्षेत्रफल में चल रही कंपनी पर इतना कम गृहकर लेने का मामला उठा तो एक कमेटी बनाकर इसकी जांच कराई गई। कर निर्धारण अधिकारी कुलदीप सिंह के नेतृत्व में कमेटी की जांच में सामने आया है कि कंपनी में एक लाख 18 हजार 43 वर्गफीट पक्का निर्माण है। इस हिसाब से 24 मीटर चौड़ी सड़क पर स्थित कंपनी का वार्षिक मूल्यांकन चार करोड़ 25 लाख 27 हजार 809 रुपये के आधार पर गृहकर 46 लाख 78 हजार 59 रुपये होना चाहिए।
टैक्स इंस्पेक्टर, लिपिक के साथ जोनल अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कंपनी में आरबी और आरआरसी निर्माण नहीं है, जबकि जांच में 1.18 लाख वर्गफीट से अधिक पक्का निर्माण मिला। रविवार को नगर निगम सदन में पार्षद राजू शुक्ला ने यह मामला उठाया तो नगर आयुक्त ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। सोमवार को उन्होंने दोनों को निलंबित कर दिया। नैनी के महेवा रोड पर स्थित एक बडे़ शिक्षण संस्थान के गृहकर में भी इसी तरह का हेरफेर किया गया है। कंपनी और शिक्षण संस्थान के मामले में जेडओ सहित कई अन्य कर्मियों पर भी गाज गिरने की संभावना है।