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मानदेय के लिए नाम भेजने में प्रबंधक कर रहे हेर-फेर

Mon, 22 Jun 2015 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। प्रदेश सरकार की ओर से वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय देने की योजना प्रबंधकों और प्रधानाचार्य की मनमानी की भेंट चढ़ गई है। स्कूल प्रबंधन शिक्षकों के नाम भेजने के लिए उनसे मनमानी वसूली कर रहे हैं। वर्षों से उसी स्कूल में पढ़ा रहे शिक्षक प्रबंधन की मनमानी के शिकार हैं, प्रबंधक की डिमांड नहीं पूरी करने पर शिक्षकों का नाम मानदेय सूची से बाहर कर दिया गया।
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यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन से पहले शिक्षक संगठनों की ओर से बहिष्कार के बाद प्रदेश सरकार की ओर से वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय देने की घोषणा की गई थी। प्रदेश सरकार ने जिला विद्यालय निरीक्षकों के जरिए स्कूल प्रबंधकों से मानदेय पाने वाले शिक्षकों के नाम मांगे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षकों की ओर से वित्तविहीन प्रबंधकों को बार-बार चेतावनी देने के बाद भी नाम नहीं भेजे गए।

 स्कूल प्रबंधन नाम भेजने के लिए शिक्षकों का दोहन कर रहा है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी का कहना है कि सरकार ने दो महीने के भीतर दो बार वित्तविहीन शिक्षकों के बारे में अलग-अलग जानकारी मांगकर उनके  दोहन का रास्ता खोल रही है। उन्होंने बताया कि प्रबंधक शिक्षकों पर सेवा नियमावली 2001 का हवाला देकर उनपर दबाव बना रहे है। शिक्षकों को कहा जा रहा है कि उनकी चयन प्रक्रिया पूरी तरह से वैध नहीं है। इसकी आड़ में शिक्षकों को परेशान किया जा रहा है। पता चला है कि स्कूल प्रबंधन नाम भेजने के लिए शिक्षकों से कई चक्र में वसूली कर रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से उसी स्कूल में पढ़ा रहे शिक्षक को बाहर करके प्रबंधक अपने रिश्तेदारों को बैक डोर से तैनाती दे रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक कोमल यादव का कहना है कि शासन स्तर से शिक्षकों से कुछ अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है। उसे पूरा करके शासन को भेज दिया जाएगा। शिक्षकों को परेशान किए जाने के बारे में उनका कहना है कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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