होली के उल्लास में सराबोर होने से पहले बृहस्पतिवार की शाम होलिका दहन किया गया। शहर के अनेक चौराहों पर सजी होलिका में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आग लगाई गई तो होलिकाएं धू-धू कर जल उठीं। होलियारों ने अबीर-गुलाल उड़ाकर होलिका की पर्क्रिमा की और फिर होलिकास्थल पर ही एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की बधाई दी। डीजे की धुन पर युवाओं को टोली ने जमकर डांस भी किया। दहन से पहले तक होलिका सजाने का सिलसिला जारी रहा।
दहन से पहले प्रदोषकाल में विधिविधान से पूजन किया गया। गेहूं की बाली, चने की पौध, गुड़, उबटन की टिक्की, गोबर का बल्ला गुझिया आदि डालकर अग्नि की परिक्रमा की गई। गाय के गोबर से बने बल्लों की माला पिरोकर उबटन के उतरन की पिंडिंयों और सूत के साथ होलिका को समर्पित की गई। उत्साही युवकों ने होली गीतों पर जमकर डांस किया। शायद ही कोई छोटा-बड़ा चौराहा बचा, जहां लाउडस्पीकरों से बजते गानों के बीच युवाओं, किशोरों ने जमकर डांस किया। कई मोहल्लों में फाग की मस्ती का रंग बिखरा। रंगों की बारिश शुक्रवार को होगी लेकिन अबीर गुलाल से ही होली की दस्तक हई।
महीयसी महादेवी वर्मा के अशोक नगर स्थित आवास पर भी परंपरागत रूप से होलिका दहन हुआ। घर की मुखिया रानी पांडेय की देखरेख में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका जलाई गई। होलिका दहन के बाद उन्होंने महादेवी की तर्ज पर मौजूद सभी लोगों की राईनोन से नजर उतारी। अबीर-गुलाल के बीच शब्दरंगों से सभी रीझे, भीगे।
वहीं कैलाश गौतम सृजन संस्थान और साहित्य सहकार न्यास की ओर से सांस्कृतिक संध्या ‘रागरंग’ में होली गीतों के रंग में सभी डूबे। इसके तहत प्रोफेसर अनिता गोपेश, सुधांशु उपाध्याय, हरीशचंद्र पांडे, अनिल रंजन भौमिक, फरमूद इलाहाबाद, अंशु मालवीय, श्रीनिवास शंकर राय आदि ने रचनापाठ किया। संचालन यश मालवीय, संयोजन श्लेष गौतम और धन्यवाद ज्ञापन ब्रजेश पांडेय ने किया।
होली के दो दिवसीय पर्व के लिए लोगों ने बृहस्पतिवार को ही तैयारी पूरी कर ली। रंग से लेकर पिचकारियों तक की देर रात तक खरीदारी होती रही। चौक, घंटाघर, जानसेनगंज, सिविल लाइंस, मुट्ठीगंज, कीडगंज, कटरा, अल्लापुर आदि इलाके रात भर गुलजार रहे। लोगों ने जमकर खरीदारी की। घरों में भी रात भर गुझिया, पापड़, दही बड़े आदि बनते रहे। महिलाओं ने भी एक दूसरे को रंगों से सरोबार करने की तैयारी की। शुक्रवार को धकाधक चौराहे एवं वेणीमाधव मंदिर के पास कच्ची सड़क पर और शनिवार को दारागंज के कई अन्य चौराहों पर दमकल होली खेली जाएगी। कीडगंज और सदियापुर में पहले दिन तो रंग जबकि दूसरे दिन कीचड़- गोबर की होली खेली जाएगी।