संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के चयन का ग्राफ हर साल तेजी से गिर रहा है। मुख्य परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या दस साल में 35 फीसदी से घटकर महज दो फीसदी रह गई है और इसी अनुपात में अंतिम चयन में भी तेजी से गिरावट दर्ज की गई है।
यूपीपीएससी की ओर से 2010 में किए गए बदलावों के बाद हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों की मुसीबत बढ़नी शुरू हुई और अब इस मुसीबत से उबरने के लिए हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों ने आंदोलन का रुख किया है। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही हैं प्रतियोगी छात्रा शालिनी और उनकी टीम ने सिविल सेवा परीक्षा में जब हिंदी माध्यम अभ्यर्थियों के चयन से संबंधित आंकड़े जुटाने शुरू किए तो जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले रहे।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010 में मुख्य परीक्षा में कुल 11859 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनमें हिंदी माध्यम के 4194 (36 फीसदी) एवं अंग्रेजी माध्यम के 7371 (63 फीसदी) अभ्यर्थी थे और बाकी अभ्यर्थी अन्य माध्यमों के थे।
2016 में 15149 अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें हिंदी माध्यम के महज 1320 (महज 8.7 फीसदी) और अंग्रेजी माध्यम के 13490 (89 फीसदी) अभ्यर्थी शामिल हुए। वर्ष 2018 में स्थिति काफी खराब हो गई। मुख्य परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी की संख्या महज दो फीसदी के आसपास रह गई और कुल पदों के मुकाबले हिंदी माध्यम के केवल आठ अभ्यर्थियों का अंतिम रूप से चयन हुआ।