कोर्ट ने कहा है कि शिकायत दर्ज होते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर डीजे या अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्र बंद कराए और सक्षम अधिकारी को रिपोर्ट करे ताकि दोषी पर कार्रवाई की जा सके। कोर्ट ने कहा है कि शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाए। अनाम शिकायत भी दर्ज हो। एसएमएस, व्हाट्सएप, ई-मेल आदि माध्यमों से या फोन से मौखिक मिली शिकायत भी दर्ज की जाए और संबंधित अधिकारी को सूचित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि आदेश की अवहेलना होने पर कोई भी व्यक्ति कोर्ट में अवमानना याचिका भी दायर कर सकता है। कार्रवाई न करने के लिए संबंधित थाना प्रभारी जवाबदेह माने जाएंगे। कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को सभी अधिकारियों को आदेश का पालन करने का निर्देश जारी करने के लिए कहा है।
याची का कहना था कि जिला प्रशासन ने रिहायशी इलाके हासिमपुर रोड पर एलसीडी लगाई है, जो सुबह चार बजे से आधी रात तक बजती रहती है। याची की मां 85 वर्ष की हैं। आसपास कई अस्पताल हैं। शोर से लोगों और मरीजों को परेशानी हो रही है। बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। शिकायत करने पर अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते, उल्टे प्रदूषण फैलाने में सहयोग कर रहे हैं। याचिका में ध्वनि प्रदूषण कानून का कड़ाई से पालन करने की मांग की गई थी।
यह हैं निर्देश
1- ध्वनि प्रदूषण कानून का उल्लंघन करने वाले पर प्राथमिकी दर्ज हो।
2- त्योहारों से पहले अधिकारी बैठक कर ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाना सुनिश्चित करें।
3- कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी संबंधित थानाध्यक्षों की होगी।
4- शहरी क्षेत्रों को औद्योगिक, व्यवसायिक और रिहायशी में श्रेणीबद्ध किया जाए।
5- शिकायत सुनने के लिए एक अधिकारी नियुक्त किया जाए।
6- ऐसे अधिकारी का फोन नंबर और अन्य ब्यौरा सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करें।
7- शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर जारी करें।
8- शिकायतें एक रजिस्टर पर दर्ज हों और उन पर कार्रवाई की जाए।
9- शिकायत मिलने पर पुलिस तत्काल कार्रवाई करे और शोर बंद कराए।
10- शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाए, अनाम शिकायतें भी दर्ज हों।
11- एसएमएस, व्हाट्सएप, ई-मेल से भी शिकायतें दर्ज हों।
12- कार्रवाई न होने पर जनता का कोई भी आदमी अवमानना याचिका दाखिल कर सकता है।