वकीलों को सहायता देने के लिए यूपी बार कौंसिल को 100 करोड़ रुपये की जरुरत है । मगर कौंसिल का कहना है कि उसके पास कोई ऐसा बजट नहीं है जिससे इस गाढ़े समय में वकीलों की मदद कर सके। कौंसिल के पास खुद की आमदनी का एक ही जरिया है और वो है वकीलों के पंजीकरण से होने वाली आय। बाकी की जरूरतों के लिए उसके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं। ऐसे में स्टाम्प शुल्क से होने वाली आमदनी और वकीलों के लिए बनाए गए कार्पस फंड ही मदद का जरिया बन सकते हैं।
कौंसिल के उपध्यक्ष देवेंद्र मिश्र नगरहा का कहना है कि सरकार के पास लागभग 220 करोड़ रुपए कार्पस फंड के हैं। यह रकम वकीलों की असमय मृत्यु की दशा में दी जाती है। स्टाम्प शुल्क से होने वाली आय भी सरकार के पास जमा है। मगर यह राशि अधिवक्ता वेलफेयर ट्रस्ट के जरिये ही मिल सकती है। ट्रस्ट के चेयरमैन महाधिवक्ता हैं और सदस्य सचिव प्रमुख सचिव न्याय। बार काउंसिल तबतक कुछ भी करने की स्थिति में नहीं है। जब तक ट्रस्ट से यह रकम बार कौंसिल को नहीं मिल जाती है।
ट्रस्टी समिति की बैठक 29 अप्रैल को होनी है, तभी कुछ निर्णय हो पाएगा। उधर कौंसिल के सदस्य प्रशांत सिंह अटल का कहना है कि प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव के मुताबिक कल्याणकारी स्टाम्प की बिक्री से वर्ष 2016-2017 में 2,04,81,034 रुपये/- वर्ष 2017-2018 6,00,01,000 रुपये/- वर्ष 2018-2019 38,27,984 रुपये/-वर्ष 2019-2020 4,50,30,599/- समाजिक security fund में वर्ष 2016-2017 में 1,24,79,335/- वर्ष 2017-2018 1,27,43,217/- वर्ष 2018-2019 में 1,12,04,500/ तथा वर्ष 2019-20 में 30,74,321रुपये /- उत्तर प्रदेश सरकार को प्राप्त हुए हैं। इसमें से समय समय पर बार कौंसिल को रकम दी गई है।