इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलविदा और फिर ईद उल फितर पर सामूहिक रूप से नमाज व दुआ पढ़ने के लिए प्रदेश के ईदगाहों को खोलने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने इस आशय का समादेश जारी करने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया।
कोर्ट ने कहा है कि याची अपनी मांगों को लेकर सक्षम अधिकारी के समक्ष आवेदन दे। यदि कोई आदेश नहीं होता है या उसे लटकाए रखा जाता है तब वह हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकता है। सरकार को अर्जी दिए बगैर सीधे हाईकोर्ट में याचिका दायर नहीं की जा सकती।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने एडवोकेट शाहिद अली सिद्दीकी की ओर से मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र पर कायम जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि समादेश जारी करने के लिए याची को अपनी मांग शासन स्तर पर रखनी चाहिए। कोई आदेश न होने या खिलाफ आदेश होने के बाद ही याचिका दाखिल की जा सकती है। याची ने सरकार के समक्ष अपनी मांग रखे बगैर जनहित याचिका कायम कर समादेश जारी करने की मांग की है। इस पर कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकती।