भूमि विवाद से संबंधित सभी मामलों की सुनवाई एक साथ किए जाने और हाईकोर्ट स्थानांतरित किए जाने की मांग को लेकर यह याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि अयोध्या राम मंदिर विवाद की तर्ज पर मथुरा के इस विवाद की सुनवाई भी हाईकोर्ट में की जाए। कहा गया था कि मामले में शामिल मुद्दे भगवान श्रीकृष्ण के करोड़ों भक्तों से संबंधित हैं और यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है।
साथ ही शाही ईदगाह मस्जिद के कब्जे वाली 13.37 एकड़ भूमि को श्रीकृष्ण जन्मभूमि का स्थान बताकर उसे हिंदुओं को सौंपे जाने की मांग भी की गई है। विपक्षी पक्षकार यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, प्रबंधन ट्रस्ट की समिति, शाही मस्जिद मथुरा, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान अपना जवाब दाखिल कर चुके हैं। इस मांग को लेकर मथुरा की अदालत में कई मुकदमे दाखिल हैं।
भूमि विवाद से जुड़े इन सभी मामलों की सुनवाई अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी। हाईकोर्ट में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान सात अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन, एडवोकेट विष्णु शंकर जैन, प्रभाष पांडेय और प्रदीप कुमार शर्मा ने बहस की। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल भी फैसला सुनाए जाने के दौरान मौजूद रहे।