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हाईकोर्ट ने कहा : जब रिकवरी में योगदान नहीं तो 10 फीसदी रिकवरी चार्ज नहीं वसूल सकते हैं अधिकारी

Sat, 03 Sep 2022 11:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा की खंडपीठ ने गाजियाबाद के शिवमोहन शर्मा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। मामले में पिकअप कंपनी ने याची को लोन दिया था।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब लोन कलेक्शन में कोई योगदान नहीं है तो तहसील अधिकारी 10 फीसदी रिकवरी चार्ज की वसूली नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने मामले में डीएम गाजियाबाद को निर्देश दिया कि वह बतौर रिकवरी चार्ज वसूली गई 10 लाख, 97 हजार, 700 रुपये तीन सप्ताह में याची को वापस करें। और संबंधित तहसील अधिकारियों को चेतावनी पत्र जारी करें कि भविष्य में वे ऐसे क्रियाकलाप न करें। अगर करते हैं तो उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाएगी।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा की खंडपीठ ने गाजियाबाद के शिवमोहन शर्मा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। मामले में पिकअप कंपनी ने याची को लोन दिया था। याची लोन की रकम जमा नहीं कर सका तो कंपनी ने तहसील अधिकारियों से लोन रिकवरी के लिए भेज दिया।

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याची से दो करोड़, 71 लाख, 49 हजार, 536 रुपये वसूले जाने थे। बाद में याची और कंपनी के बीच आपसी समझौता हो गया और याची ने समझौते के आधार पर ड्राफ के माध्यम से एक करोड़, नौ लाख, 77 हजार रुपये अदा कर दिए। लोन की रकम मिलने के बाद कंपनी की ओर से लोन रकम जमा होने का प्रमाणपत्र जारी किया गया।


याची के अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने तर्क दिया कि लोन जमा होने का प्रमाणपत्र डीएम और संबंधित तहसील अथॉरिटी को सौंप दिया गया। बावजूद, इसके पूरी रकम पर 10 फीसदी रकम बतौर रिकवरी चार्ज (10 लाख, 97 हजार, 700 रुपये) वसूल की गई। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने इसे गलत मानते हुए संबंधित तहसील अथॉरिटी की ओर से बतौर रिकवरी चार्ज की गई रकम को वापस करने का आदेश दिया। 
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