माया देवी ने गलत व झूठे तथ्यों को लेकर सिविल वाद दायर किया है। कोर्ट ने अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की। विपक्षी ने कोर्ट की निषेधाज्ञा के आधार पर पुलिस की सहायता से मंदिर पर कब्जा कर लिया। याचीगण को बेदखल कर दिया गया। गोविंद राम गोस्वामी ने आपत्ति दाखिल की। सुनवाई में देरी पर हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट मथुरा को आपत्ति तय करने का आदेश दिया था। जिसपर सुनवाई के बाद सिविल कोर्ट ने अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश वापस ले लिया। किंतु, याची को मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई। विपक्षी ने कोर्ट की निषेधाज्ञा समाप्त होने के बाद कब्जा कायम रखा है।
याची के पूजा अर्चना कराने के अधिकार का उल्लंघन किया जा रहा है। विपक्षी ने अर्जी दी है, जो अधीनस्थ अदालत में विचाराधीन है। जिसकी सुनवाई आठ सितंबर को होगी। मंदिर पर अवैध कब्जा और राधा अष्टमी पर्व को लेकर हाईकोर्ट से हस्तक्षेप करने की मांग में याचिका दाखिल की गई है। जिस पर कोर्ट ने विपक्षियों से जवाब मांगा है।