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हाईकोर्ट की चेतावनी : सीएमओ अगली तारीख पर नहीं आए तो जारी करेंगे वारंट, पेश न होने पर कोर्ट सख्त

Thu, 17 Oct 2024 03:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की अदालत ने चार साल से सेवानिवृत्ति बकाये के भुगतान को लेकर सीएमओ कार्यालय का चक्कर काट रहीं सहारनपुर में तैनात रहीं डॉ.निर्मला माहेश्वरी की याचिका पर दिया है। याची सहारनपुर में चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात थीं।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बकाये को लेकर आदेशों के बावजूद कोर्ट में पेश नहीं होने पर सहारनपुर के सीएमओ को कड़ी फटकार लगाई है। कहा है कि उनका आचरण अदालत की अवमानना के समान है। अगली तारीख 18 अक्तूबर को जवाबी हलफनामे संग अदालत में पेश नहीं होने पर उनके खिलाफ वारंट जारी किया जाएगा।

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यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की अदालत ने चार साल से सेवानिवृत्ति बकाये के भुगतान को लेकर सीएमओ कार्यालय का चक्कर काट रहीं सहारनपुर में तैनात रहीं डॉ.निर्मला माहेश्वरी की याचिका पर दिया है। याची सहारनपुर में चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात थीं। 30 अप्रैल 2020 को सेवानिवृत्त हो गईं। इसके बाद उन्होंने सीएमओ सहारनपुर से बकाये वेतन, पेंशन, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और अन्य भत्ते के भुगतान करने की गुहार लगाई थी। लेकिन, भुगतान नहीं किया गया। इसके खिलाफ उन्हाेंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

कोर्ट ने सीएमओ को 28 अगस्त तक व्यक्तिगत हलफनामे पर बकाये भुगतान न होने का कारण बताने का आदेश दिया था। लेकिन, हलफनामा दाखिल नहीं किया गया। इससे खफा कोर्ट ने आदेश का अनुपालन के लिए उन्हें 27 सितंबर की सशर्त मोहलत दी थी। कोर्ट ने आदेश की प्रति मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सहारनपुर के जरिये सीएमओ सहारनपुर को 48 घंटे में तामील कराने का आदेश भी दिया था।

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इसके बाद 15 अक्तूबर को मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि सीएमओ की ओर न तो कोई हलफनामा दाखिल किया गया है और न ही सीएमओ अदालत पेश हुए है। खुद हाजिर होने के बजाय उन्होंने चिकित्सा अधिकारी डॉ.रोहित वालिया को भेज दिया। यह देख कोर्ट ने हैरानी जताई।

कहा कि जब अदालत ने सीएमओ को व्यक्तिगत रूप से हाजिर रहने का निर्देश दिया था तो अपनी ओर से वह किसी अन्य अधिकारी को पेश हाेने के लिए कैसे अधिकृत कर सकते हैं। वास्तव में यह अदालत के आदेश के विपरीत है, जो आपराधिक अवमानना के समान है। कोर्ट ने सीएमओ को अतिंम अवसर देते हुए 18 अक्तूबर को दोपहर दो बजे अदालत में हलफनामे के साथ हाजिर होने को आदेश दिया है। कहा है कि पूर्व में पारित आदेशों के क्रम में अगर सीएमओ अदालत में पेश न हुए तो उनके खिलाफ वारंट जारी किया जाएगा।
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