इसके बाद 15 अक्तूबर को मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि सीएमओ की ओर न तो कोई हलफनामा दाखिल किया गया है और न ही सीएमओ अदालत पेश हुए है। खुद हाजिर होने के बजाय उन्होंने चिकित्सा अधिकारी डॉ.रोहित वालिया को भेज दिया। यह देख कोर्ट ने हैरानी जताई।
कहा कि जब अदालत ने सीएमओ को व्यक्तिगत रूप से हाजिर रहने का निर्देश दिया था तो अपनी ओर से वह किसी अन्य अधिकारी को पेश हाेने के लिए कैसे अधिकृत कर सकते हैं। वास्तव में यह अदालत के आदेश के विपरीत है, जो आपराधिक अवमानना के समान है। कोर्ट ने सीएमओ को अतिंम अवसर देते हुए 18 अक्तूबर को दोपहर दो बजे अदालत में हलफनामे के साथ हाजिर होने को आदेश दिया है। कहा है कि पूर्व में पारित आदेशों के क्रम में अगर सीएमओ अदालत में पेश न हुए तो उनके खिलाफ वारंट जारी किया जाएगा।