गांधी को अपशब्द नहीं कहे जा सकते
उच्चतम न्यायालय में वर्ष 2015 को एक मराठी कविता में गांधी के बारे में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने से संबंधित एक मामले की सुनवाई में कहा कि महात्मा गांधी को अपशब्द नहीं कह जा सकते हैं और न ही उनके चित्रण के दौरान अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
जस्टिस दीपक मिश्रा और प्रफुल्ल सी पंत की पीठ ने कहा था कि विचारों की आजादी और शब्दों की आजादी में काफी अंतर है। अगर महात्मा गांधी के बारे में अपशब्द लिखते हैं तो वो मुद्दा भी है और अपराध की श्रेणी में भी आता है। अगर आपने गांधीजी के बारे में अपशब्द लिखे तो वहां आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार खत्म हो जाता है। महात्मा गांधी पर मराठी कवि वसंत दत्तात्रेय गुर्जर द्वारा लिखित कविता 1994 में प्रकाशित करने के आरोपी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये बात कही थी।
प्रशांत भूषण ने गांधी के कथन को उद्धृत किया था
अपने खिलाफ उच्चतम न्यायालय में चल रहे अवमानना मामले में एडवोकेट प्रशांत भूषण ने वर्ष 2020 में उच्चतम न्यायालय में दिए बयान में महात्मा गांधी के एक कथन को उद्धृत किया था। दरअसल महात्मा गांधी ने एक सरकारी पत्र के प्रकाशन के दौरान उनके खिलाफ शुरू की गई अवमानना याचिका में माफी मांगने से इनकार कर दिया था। वर्ष 1919 में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजे गए पत्र में कहा था, मैं सम्मानपूर्वक उस दंड को भुगतना चाहूंगा जो माननीय मुझे देने की कृपा कर सकते हैं।