हाईकोर्ट की ओर से स्पष्ट किए गए नियमों के अनुसार फरार आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमा शुरू करने से पहले आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कम से कम 30 दिन के अंतर पर दो बार गैर जमानती वारंट जारी किए जाने चाहिए। इसके बाद उसके अंतिम ज्ञात पते वाले क्षेत्र में समाचार पत्र में एक नोटिस प्रकाशित करना होगा।
इसके बाद भी वह पेश नहीं होता है तो चार्ज फ्रेम होने की तारीख से 90 दिन बीत जाने के बाद उसकी गैरहाजिरी में मुकदमा शुरू किया जा सकता है। इस विशेष सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिकारों के संरक्षण के नियम भी बताए गए।
यदि फरार घोषित आरोपी का अपना कोई निजी वकील नहीं है तो अदालत को राज्य के सरकारी खर्च पर उसके बचाव के लिए एक वकील नियुक्त करना होगा। गवाहों के बयानों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से रिकाॅर्ड किया जाएगा। इस पूरी व्यवस्था को लागू करने में लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ गंभीर विभागीय कार्रवाई व अवमानना का मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया गया।