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अदालतों में लंबित मुकदमों की भरमार, जजों के कई पद खाली

Mon, 14 Mar 2016 01:58 AM IST
धीरज कनोजिया, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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देशभर के हाईकोर्ट से लेकर निचली अदालतों में लंबित मुकदमों और जजों के खाली पदों की भरमार हैं। देश की विभिन्न अदालतों में तीन करोड़ से ज्यादा मुकदमे लंबित हैं। देश के 24 उच्च न्यायालयों में 38.5 लाख मुकदमे लंबित हैं। देश के सभी हाईकोर्ट में 1056 जजों के पद मंजूर किए गए हैं, मगर सिर्फ  591 जज ही मौजूद हैं। जिला और निचली अदालतों में 20,500 न्याय अधिकारियों की जरूरत है। मगर सिर्फ  16 हजार अधिकारी ही मौजूद हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 150 साल पूरा होने के मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बाकायदा आंकड़ों के जरिए न्याय में देरी और अन्याय की बात को साबित किया।
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देश के हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या भले ही 2014 में 41.5 लाख से घटकर 2015 में 38.5 लाख हो गई हो। मगर अब भी एक लंबा रास्ता तय किया जाना बाकी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सिर्फ  71 जज हैं, जबकि 160 जजों के पद मंजूर किए गए हैं। 2014 में 10.1 लाख लंबित मामलों की संख्या घटकर 2015 में 9,11,908 हुई है। वहीं पूरे उत्तर प्रदेश में निचली अदालतों में इस साल फरवरी तक 57,06,103 मुकदमे लंबित पड़े हैं, जिसमें से 42,17,089 मामले आपराधिक हैं।

राष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों से अदालतों में लंबित मामलों की संख्या घटाने में पहल करने की अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार न्याय प्रणाली की मदद कर लंबित मामलों और जजों के खाली पदों को भरने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। राष्ट्रपति का मानना है कि सरकारें, जज और वकील एकजुट होकर आम लोगों को समय पर न्याय दिलाने की बड़ी पहल कर सकते हैं।
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