इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आरोप गंभीर नहीं हैं और कर्मचारी के पद पर बने रहने से विभागीय जांच प्रभावित होने की संभावना न हो तो निलंबन की कार्रवाई को जारी रखना अनुचित है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने विद्युत वितरण निगम में कार्यरत अवर अभियंता किशन स्वरूप के निलंबन आदेश को रद्द करते हुए उन्हें बहाल करने का आदेश दिया है।
याची वितरण निगम में कनिष्ठ अभियंता के पद पर तैनात हैं। 19 फरवरी को दो ट्रांसफार्मरों की खराबी और पर्यवेक्षणीय लापरवाही के आरोप निलंबित कर दिया गया था। इसके खिलाफ याची ने एकल पीठ का दरवाजा खटखटाया। एकल पीठ ने आदेश दिया कि यदि दो सप्ताह में आरोप पत्र दाखिल नहीं होता है, तो निलंबन स्थगित रहेगा।
याची ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ विशेष अपील दाखिल की। कोर्ट ने पाया कि लगाए गए आरोपों के आधार पर ऐसा नहीं प्रतीत होता कि जांच के अंत में कोई बड़ा दंड दिया जा सकता है । अभिलेखों में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि यदि याची सेवा में बहाल रहता है, तो वह जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। लिहाजा, कोर्ट ने याची के निलंबन को इस शर्त के साथ रद्द कर दिया कि वह विभागीय जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे। साथ ही, विभाग को आदेश दिया कि जांच की कार्यवाही को आज से 60 दिनों के भीतर पूरा करने का आदेश दिया है।