इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गलत तरीके से रिमांड आदेश पारित करने के मामले को गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने मोहम्मद हारून की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्काल रिहाई का आदेश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गलत तरीके से रिमांड आदेश पारित करने के मामले को गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने मोहम्मद हारून की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। साथ ही संबंधित रिमांड मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगते हुए विवेचनाधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है।
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पीलीभीत के जहानाबाद थाना क्षेत्र के मोहम्मद हारून और अन्य ने गिरफ्तारी के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। अधिवक्ता ने दलील दी कि उमंग रस्तोगी मामले के उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णय और उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार अरेस्ट मेमो में याची की गिरफ्तारी के आधारों का उल्लेख नहीं किया गया है। ऐसे में अरेस्ट मेमो और रिमांड ऑर्डर को निरस्त किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने अरेस्ट मेमो और रिमांड आदेश को रद्द कर पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया है कि विवेचनाधिकारी के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करें। अगली सुनवाई तक इस संबंध में अनुपालन शपथ पत्र दाखिल किया जाए। वहीं, संबंधित रिमांड मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर पूछा है कि उच्च न्यायालय की ओर से उमंग रस्तोगी केस और सर्वोच्च न्यायालय की ओर से मिहिर राजेश शाह केस में प्रतिपादित सिद्धांतों की जानकारी है या नहीं। अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी।