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यूपी : वकीलों की हड़ताल पर हाईकोर्ट सख्त, बार के दो अध्यक्षों व दो महासचिवों पर अवमानना के आरोप तय

Fri, 07 Apr 2023 10:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर के दो बार एसोसिएशनों के अध्यक्षों व महासचिवों के खिलाफ आपराधिक अवमानना के आरोप निर्मित कर सफाई मांगी है। इन पर अदालत को स्कैंडलाइज्ड करने व गरिमा धूमिल करने व अदालती कामकाज में हड़ताल कर व्यवधान उत्पन्न करने का आरोप है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर के दो बार एसोसिएशनों के अध्यक्षों व महासचिवों के खिलाफ आपराधिक अवमानना के आरोप निर्मित कर सफाई मांगी है। इन पर अदालत को स्कैंडलाइज्ड करने व गरिमा धूमिल करने व अदालती कामकाज में हड़ताल कर व्यवधान उत्पन्न करने का आरोप है।

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यूपी बार काउंसिल के अध्यक्ष पांचू राम मौर्य ने कहा कि इस मामले में कमेटी गठित कर बैठक बुलाएंगे और उचित निर्णय लेंगे। बार काउंसिल चेयरमैन ने इसके लिए मंगलवार तक का समय मांगा है। कोर्ट ने इस पर मंगलवार को बार काउंसिल के निर्णय की जानकारी मांगी है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा बार एसोसिएशन का अध्यक्ष व महासचिव स्वयं कोई निर्णय नहीं ले सकते।

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आम सभा बुलाकर ही कोई फैसला लिया जा सकता है। इसलिए मंगलवार तक आदेश टाला जाय और कानपुर की बार एसोसिएशन को आमसभा बुलाकर निर्णय लेने के लिए मंगलवार तक का समय दिया जाय। कोर्ट ने कहा यदि कानपुर नगर की बार एसोसिएशन हड़ताल वापस लेकर काम पर लौटती हैं तो आदेश पर विचार किया जायेगा। अभी कोई कार्रवाई नहीं की जायेगी। वकील अपना आचरण सुधारें। काम पर वापस आएं।

कोर्ट ने कानपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी व महासचिव अनुराग श्रीवास्तव एवं लायर्स एसोसिएशन कानपुर नगर के अध्यक्ष रवींद्र शर्मा व महासचिव शरद कुमार शुक्ल के खिलाफ आपराधिक अवमानना का आरोप निर्मित किया है। इन पर आचरण, बयान व हड़ताल कर न्यायिक कार्य में व्यवधान डालने का आरोप है। इन्होंने वकीलों को काम पर जाने से रोका, धमकी दी, असंसदीय भाषा का प्रयोग किया। कोर्ट को स्कैंडलाइ्ड कर तौहीन किया है इसलिए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही की जाय।

अध्यक्ष ने कहा, अकेले हड़ताल समाप्त नहीं कर सकते, भले ही जेल भेज दिया जाय

25 मार्च से जारी कानपुर के वकीलों की हड़ताल पर कोर्ट ने नोटिस जारी कर सात अप्रैल शुक्रवार को 10 बजे दोनों बार संगठनों के अध्यक्ष व महासचिव को हाजिर होने का निर्देश दिया था। कहा कि हड़ताल पर बार की आम सभा में ही निर्णय हो सकता है। वे अकेले हड़ताल समाप्त नहीं कर सकते। उन्हें जान का खतरा है। भले ही उन्हें जेल भेज दिया जाय। कहा जिला जज पर भी कार्रवाई की जाय। उनके खिलाफ शिकायत है।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भ्रष्टाचार के मामले में हलफनामे पर उनके खिलाफ शिकायत की है। कोर्ट ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। इस पर कोर्ट ने कहा कि कोई कानूनी तथ्य हो तो बताइए। अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें पांच मिनट का वक्त देकर सुन लिया जाए। ताकि, वे हड़ताल की स्थिति पर अपना पक्ष स्पष्ट कर सकें कि किन परिस्थितियों में न्यायिक कार्य से विरत होना पड़ा।

कोर्ट ने कहा कि आदेशों की अवहेलना में आपको जेल भेजा जा सकता है। अध्यक्ष ने कहा, वह अपनी बात रख रहे हैं। उनकी भी शिकायत सुनी जाए। अच्छा होता कि जिसके खिलाफ शिकायत है, उसको भी बुलाया जाता। यह वकीलों के साथ अन्याय हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि आप बार को नियंत्रित नहीं कर सकते तो इस्तीफा दे दीजिए। अध्यक्ष ने कहा कि हुजुर, अध्यक्ष बनने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। बार की आम सभा ने जिला जज के व्यवहार से आहत होने पर यह कदम उठाया।

कोर्ट ने कहा, आपकी हरकतों से वह पूरी तरह वाकिफ है। आपने काम करने वालों को धमकाने की नोटिस चस्पा की है। अध्यक्ष ने कहा कि कि उन्होंने कोई नोटिस चस्पा नहीं की है और किसी को काम करने से रोका। कोर्ट सुबह सुनवाई करने के बाद दोपहर में फिर बैठी और बार के चार पदाधिकारियों के खिलाफ अवमानना का आरोप तय करने का आदेश सुनाया।

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हाईकोर्ट बार अध्यक्ष ने कहा आम सभा से ही हड़ताल वापस होगी

आरोप तय करने के बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा कि हड़ताल वापसी का निर्णय आम सभा में ही तय हो सकता है। इसके लिए मंगलवार तक का समय कानपुर नगर बार एसोसिएशन को दिया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल चेयरमैन पांचू राम मौर्य ने कहा कि इस मामले में उन्हें भी समय दिया जाए। वह आवश्यक बैठक बुलाकर मामले के निस्तारण के लिए कमेटी बनाएंगे और उसकी रिपोर्ट के अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे। कोर्ट ने कहा कि वकील काम पर वापस लौटें तो अवमानना के मामले की सुनवाई पर वह विचार करेगी।

यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर, न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, न्यायमूर्ति एस पी केशरवानी, न्यायमूर्ति एम के गुप्ता, न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र, न्यायमूर्ति के जे ठाकर एवं न्यायमूर्ति एम सी त्रिपाठी की वृहदपीठ ने दिया है। महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र व अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने भी पक्ष रखा। कहा कि हड़ताल अवैध है। हम समर्थन नहीं करते।

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