इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी निवासी वरिष्ठ नागरिक अरुण कुमार शुक्ला की पेंशन में सेवानिवृत्ति के करीब आठ साल बाद की गई कटौती पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा जब तक मामला विचाराधीन है तब तक याची को बिना कटौती के उसकी मूल पेंशन राशि का भुगतान जारी रखा जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने दिया है।
याचिकाकर्ता तकनीकी शिक्षा विभाग से सेवा से 31 दिसंबर 2017 को सेवानिवृत्त हुए थे। उनका अंतिम आहरित वेतन 1,19,300 रुपये था और इसी आधार पर उन्हें पेंशन मिल रही थी। हालांकि, छह नवंबर 2025 के आदेश से संबंधित प्राधिकारी ने कमेटी की सिफारिश पर उनकी पेंशन का पुनर्निर्धारण कर दिया। इससे उनकी पेंशन में कमी हो गई। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि 16 जनवरी 2007 के शासनादेश की धारा सात के अनुसार सेवानिवृत्ति के 34 महीने बाद कर्मचारी के रिकॉर्ड में संशोधन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सुशील कुमार सिंघल बनाम प्रमुख सचिव सिंचाई विभाग (2014) के फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें 34 महीने की समय सीमा के बाद ऐसे हस्तक्षेप से सुरक्षा की बात कही गई थी।
कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। तब तक छह नवंबर 2025 के आदेश पर रोक रहेगी और याचिकाकर्ता को मूल पेंशन भुगतान आदेश के अनुसार बिना कटौती पेंशन दी जाएगी।