इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किताबघर के नाम से मशहूर सिविल लाइंस की नजूल भूमि से बेदखली के लिए जारी नोटिस पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने नॉर्थ इंडिया क्रिश्चियन ट्रैक्ट एंड बुक सोसाइटी व चार अन्य की याचिका पर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किताबघर के नाम से मशहूर सिविल लाइंस की नजूल भूमि से बेदखली के लिए जारी नोटिस पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने नॉर्थ इंडिया क्रिश्चियन ट्रैक्ट एंड बुक सोसाइटी व चार अन्य की याचिका पर दिया है। याचियों का दावा है कि वे इस जमीन पर लंबे समय से कब्जे में हैं। संपत्ति की लीज बढ़ाने के लिए उनका आवेदन संबंधित प्राधिकारी के समक्ष विचाराधीन है। इसके बावजूद भवन के गेट पर संपत्ति खाली करने का नोटिस चस्पा कर दिया गया।
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याचियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि लीज विस्तार के मामले में उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटिस देकर अपनी आपत्तियां रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था। लीज की शर्तों के अनुसार 30-30 वर्ष की अवधि के लिए विस्तार का प्रावधान होने का भी दावा किया गया। उनका आरोप था कि इस प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे भवन खाली कराने की कार्रवाई की जा रही है।
राज्य सरकार की ओर से पेश मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए कोर्ट से समय की मांग की। कोर्ट ने विस्तृत जानकारी तलब करते हुए फिलहाल अंतरिम राहत दे दी। स्पष्ट किया कि विवादित नोटिस के आधार पर उनके खिलाफ कोई भी जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह रोक अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।