इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानाचार्य पद के वेतन भुगतान से जुड़े मामलों में जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) की ओर से बार-बार गलत आदेश पारित किए जाने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे अवमाननापूर्ण करार देते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने दिया है।
याची स्मिता तिवारी की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में हाईकोर्ट ने वीरेश चंद्र मिश्रा प्रकरण में निर्धारित कानूनी सिद्धांत के आधार पर डीआईओएस को आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि याची को प्रधानाचार्य पद का बकाया और वर्तमान वेतन तीन माह के भीतर भुगतान किया जाए। इसके बावजूद हाईकोर्ट के एक पुराने एकलपीठ के फैसले के आधार पर आदेश पारित किए जा रहे हैं जिसे विशेष अपील में संशोधित किया जा चुका है।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि उसके समक्ष ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जिनमें विभिन्न डीआईओएस हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद गलत आदेश जारी कर रहे हैं। इससे पहले प्रमोद कुमार व अन्य के मामले में भी अदालत ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से हलफनामा दाखिल करने को कहा था। सुनील कुमार मिश्रा के मामले में भी अदालत इस मुद्दे पर संज्ञान ले चुकी है। हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि अधिकारी अदालत के आदेशों और वीरेश चंद्र मिश्रा प्रकरण में निर्धारित कानूनी स्थिति की अवहेलना क्यों कर रहे हैं।