इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (पीसीएस)-2025 के परिणाम से जुड़े मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को अंतिम परिणाम घोषित करने से रोक दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मुख्य परीक्षा के बाद साक्षात्कार की प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन याचिका पर फैसला आने तक अंतिम परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने संजय कुमार और तीन अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में आयोग के नौ जनवरी 2020 के कार्यालय ज्ञापन, पीसीएस-2025 की भर्ती के विज्ञापन में दिए गए सामान्य निर्देशों के बिंदु 19 और एक दिसंबर 2025 को घोषित प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को चुनौती दी गई है।
याचियों का कहना है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के ऐसे मेधावी आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में शामिल नहीं किया गया, जिन्होंने सामान्य वर्ग के कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए थे। याचिका में प्रारंभिक परीक्षा का संशोधित परिणाम घोषित करने और ऐसे अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में समायोजित कर मुख्य परीक्षा आयोजित करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
याचियों के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि साक्षात्कार शुरू हो चुके हैं। ऐसे में आगे किसी तरह की जटिलता उत्पन्न होने से बचाने के लिए अंतरिम राहत दी जानी चाहिए। आयोग की ओर से भी बताया गया कि साक्षात्कार शुरू हो चुके हैं और यह प्रक्रिया कम से कम एक महीने तक चलेगी।
कोर्ट ने साक्षात्कार जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन अंतिम परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को एक सप्ताह के भीतर लिखित बहस दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। वहीं, पीसीएस-2024 को लेकर आशीष कुमार मौर्या और चार अन्य की ओर से दाखिल याचिका में भी कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।