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हाईकोर्ट ने कहा : पक्षकारों के बीच समझौता करना लोक अदालत का पहला फर्ज, बुलंदशहर लोक अदालत का फैसला रद्द

Fri, 14 Aug 2026 08:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पक्षकारों के बीच समझौता कराना स्थायी लोक अदालत का पहला फर्ज है। सुलह के प्रयास विफल होने के बाद ही वह मामले के गुण-दोष पर फैसला कर सकती है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पक्षकारों के बीच समझौता कराना स्थायी लोक अदालत का पहला फर्ज है। सुलह के प्रयास विफल होने के बाद ही वह मामले के गुण-दोष पर फैसला कर सकती है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने बुलंदशहर की स्थायी लोक अदालत के फैसले को रद्द कर दिया है। साथ ही मामले पर सुलह समझौता प्रक्रिया का पालन करने के बाद नए सिरे से फैसला लेने का आदेश दिया है। बुलंदशहर निवासी स्मृति रविता व तीन अन्य की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत सुलह प्रक्रिया अपनाना स्थायी लोक अदालत के लिए अनिवार्य है। सुलह के वास्तविक प्रयास किए बिना सीधे विवाद के गुण-दोष पर निर्णय नहीं दिया जा सकता।

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याचियों के अधिवक्ता ने कहा कि स्थायी लोक अदालत ने पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण समझौते के लिए कोई वास्तविक प्रयास नहीं किया। फैसले में केवल सुलह के लिए तारीख निर्धारित किए जाने का उल्लेख है। यह नहीं बताया गया कि उस दिन समझौते के लिए क्या प्रयास किए गए और वे क्यों विफल रहे। राज्य की ओर से पेश स्थायी अधिवक्ता भी इसका खंडन नहीं कर सके। कोर्ट ने कहा कि फैसलों में सुलह के प्रयासों का विवरण नहीं होना इस बात का संकेत है कि वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। लिहाजा, कोर्ट ने लोक अदालत का फैसला रद्द कर मामला बुलंदशहर के स्थायी लोक अदालत को वापस भेज दिया।

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