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हाईकोर्ट सख्त : थाने से सीसीटीवी फुटेज गायब मिला तो पुलिस के खिलाफ अवैध हिरासत का आरोप सच माना जाएगा

Thu, 01 Oct 2026 02:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत और थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति पर कड़ा फैसला सुनाया है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत और थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति पर कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि थाने से सीसीटीवी फुटेज गायब रहता है या जानबूझकर बंद रखा जाता है और पुलिस किसी व्यक्ति को पूछताछ के बाद रिहा करने का कोई पुख्ता दस्तावेज या सबूत पेश नहीं कर पाती है तो अदालत याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए अवैध हिरासत के आरोपों को ही सच और अंतिम मानकर आदेश जारी करेगी।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने दिया है। देवरिया निवासी महेंद्र गौर और तीन अन्य याचियों ने गौरी बाजार थाने में पुलिस की ओर से गैर-कानूनी तरीके से बंद रखने के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। याचियों का आरोप था कि पुलिस ने उन्हें बिना किसी एफआईआर, गिरफ्तारी या मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए कई दिनों तक अवैध हिरासत में रखा।

सुनवाई के दौरान जब थाने का सीसीटीवी रिकॉर्ड मांगा गया तो वह कई दिनों का गायब मिला। तत्कालीन थाना प्रभारी ने कैमरे खराब होने और मैकेनिक से ठीक कराने की बात कही, लेकिन जनरल डायरी में इसका कोई उल्लेख नहीं था और न ही कोई तकनीकी रिपोर्ट पेश की गई।

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हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के परमवीर सिंह सैनी मामले का हवाला दिया। कहा कि थानों में सीसीटीवी कैमरों का 24 घंटे चालू रहना अनिवार्य है। यदि तकनीकी खराबी आती भी है तो उसका तुरंत लेखा-जोखा होना चाहिए। कैमरे बंद होने की स्थिति में पुलिस को हर आने-जाने वाले व्यक्ति का समय के साथ जनरल डायरी में दर्ज करना चाहिए। रिहाई के समय परिजनों का हस्ताक्षर या वीडियोग्राफी का साक्ष्य भी रखना चाहिए।

कोर्ट याचियों के दावों को सही ठहराते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह पीड़ित नागरिकों को उनकी अवैध हिरासत की अवधि के अनुसार मुआवजा प्रदान करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट आदेश दिया है कि मुआवजे की यह राशि जांच के बाद जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूली जाए। साथ ही उनकी सर्विस बुक में इस असंतोष को दर्ज करने का आदेश दिया है। कुल 65 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

थाना प्रभारी ने कोर्ट में मांगी माफी

तत्कालीन थाना प्रभारी डॉ.महेंद्र कुमार स्वयं इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने अपनी कथित चूक के लिए क्षमा मांगी है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में सामने आए तथ्यों से पता चलता है कि डॉ.महेंद्र कुमार के कार्यों से कार्यपालिका का दुरुपयोग हुआ है। उन्होंने याचिकाकर्ताओं के अधिकारों का हनन किया है। कोर्ट ने उनकी सेवा पुस्तिका में कोर्ट के असंतोष को दर्ज करने का आदेश दिया है।
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