हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के परमवीर सिंह सैनी मामले का हवाला दिया। कहा कि थानों में सीसीटीवी कैमरों का 24 घंटे चालू रहना अनिवार्य है। यदि तकनीकी खराबी आती भी है तो उसका तुरंत लेखा-जोखा होना चाहिए। कैमरे बंद होने की स्थिति में पुलिस को हर आने-जाने वाले व्यक्ति का समय के साथ जनरल डायरी में दर्ज करना चाहिए। रिहाई के समय परिजनों का हस्ताक्षर या वीडियोग्राफी का साक्ष्य भी रखना चाहिए।
कोर्ट याचियों के दावों को सही ठहराते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह पीड़ित नागरिकों को उनकी अवैध हिरासत की अवधि के अनुसार मुआवजा प्रदान करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट आदेश दिया है कि मुआवजे की यह राशि जांच के बाद जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूली जाए। साथ ही उनकी सर्विस बुक में इस असंतोष को दर्ज करने का आदेश दिया है। कुल 65 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
थाना प्रभारी ने कोर्ट में मांगी माफी
तत्कालीन थाना प्रभारी डॉ.महेंद्र कुमार स्वयं इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने अपनी कथित चूक के लिए क्षमा मांगी है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में सामने आए तथ्यों से पता चलता है कि डॉ.महेंद्र कुमार के कार्यों से कार्यपालिका का दुरुपयोग हुआ है। उन्होंने याचिकाकर्ताओं के अधिकारों का हनन किया है। कोर्ट ने उनकी सेवा पुस्तिका में कोर्ट के असंतोष को दर्ज करने का आदेश दिया है।