याचियों की ओर से यूपी सरकार की ओर से लघु खनिज (रियायत) नियमावली 1963 के नियम 21(4) व 70(2) और यूपी लघु खनन (रियायत) नियमावली 2020 के नियम 21(5) और नियम 72(2) को संशोधन करने वाले 48वें शासनादेश को चुनौती दी गई थी। यूपी सरकार की ओर से इस संबंध में 24 फरवरी 2020 और 10 अगस्त 2022 को शासनादेश जारी किया गया था। याचियों ने उसे चुनौती दी।
यूपी सरकार की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया कि अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए यह शासनादेश जारी किया गया और रेगुलेटरी शुल्क लगाया गया। याचियों की ओर से इसे गलत बताया गया। कहा गया कि यह जबरन थोपा गया है। हालांकि, सरकारी अधिवक्ता की ओर से इसका विरोध किया गया। कहा गया कि जारी किया गया शासनादेश संवैधानिक दायरे में है। कोर्ट ने इन तथ्यों को देखते हुए याचिका को खारिज कर दिया।