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UP : हाईकोर्ट ने शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पर सरकार से मांगी आख्या, एडेड जूनियर हाईस्कूल में भर्ती का मामला

Wed, 07 Jan 2026 01:40 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया को इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्वालिफाई अभ्यर्थियों ने चुनौती दी है।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया को इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्वालिफाई अभ्यर्थियों ने चुनौती दी है। चयन परीक्षा–2021 के बाद शिक्षा निदेशक बेसिक की ओर से अपनाई जा रही प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। इस पर कोर्ट ने सरकार से तीन दिन में आख्या देने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने कृपा शंकर सहित 50 याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका पर दिया।
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याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस के लिए निर्धारित ऊर्ध्वाधर आरक्षण और दिव्यांग, महिला समेत अन्य वर्गों के लिए क्षैतिज आरक्षण का पालन नहीं किया गया है। साथ ही विज्ञापन में रिक्त एवं आरक्षित पदों का विवरण भी नहीं दिया गया। मंगलवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से समय मांगे जाने पर कोर्ट ने तीन दिन में आख्या दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 12 जनवरी तय की है। 
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फर्जी स्टाम्प पेपर पर बैनामा मामले में अधिवक्ता को मिली जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी स्टाम्प पेपर पर बैनामा कराने के आरोप से जुड़े एक मामले में अधिवक्ता को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने एक अधिवक्ता की जमानत अर्जी पर दिया। अधिवक्ता के खिलाफ मेरठ के सिविल लाइंस थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप है कि एक जमीन की बिक्री का बैनामा फर्जी स्टाम्प पेपर पर कराया गया। मामले में स्टाम्प विक्रेता समेत कई को आरोपी बनाया गया है।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि याची ने केवल अधिवक्ता के रूप में पहचान की भूमिका निभाई थी। फर्जी स्टाम्प पेपर खरीदने का आरोप सह-आरोपी स्टाम्प विक्रेता पर है, जिसे पहले ही हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। इसके अलावा, बैनामा कराने वाले खरीदार ने बाद में स्टाम्प शुल्क जमा कर दिया है, जिससे सरकार को कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ। साथ ही मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। याची 10 जनवरी 2025 से जेल में है और अब पूछताछ के लिए हिरासत जरूरी नहीं है। 
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