इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधान के खिलाफ की गई शिकायत मामले में प्रस्तुत की गई जांच रिपोर्ट पर कहा कि नवंबर में जांच पूरी न होने की बात कही गई और उसके बाद सितंबर की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधान के खिलाफ की गई शिकायत मामले में प्रस्तुत की गई जांच रिपोर्ट पर कहा कि नवंबर में जांच पूरी न होने की बात कही गई और उसके बाद सितंबर की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई। इससे जांच की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह होता है। कोर्ट ने इस विरोधाभास को गंभीर मानते हुए प्रयागराज के डीएम को इस मामले का जांच कर एक माह के भीतर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार की एकल पीठ ने दिया है।
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प्रयागराज निवासी कृपा शंकर ने करछना तहसील के ग्राम पंचायत हथसरा के प्रधान के खिलाफ शिकायत की थी। डीएम के आदेश से उत्तर प्रदेश पंचायत राज जांच नियमावली के तहत जांच शुरू हुई, लेकिन पूरी नहीं हुई। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि 19 नवंबर 2025 को जांच अधिकारी के अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया था कि आवश्यक अभिलेख उपलब्ध न होने के कारण अंतिम जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जा सकी है।
वहीं, जनवरी में सुनवाई के दौरान एक सितंबर 2025 की तारीख वाली जांच रिपोर्ट संलग्न कर दी गई। इस पर कोर्ट ने जांच रिपोर्ट को संदिग्ध माना और डीएम को निर्देश दिया कि वे जांच अधिकारी की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर स्वतंत्र रूप से विचार करें।