याचियों की दलील
याचियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि एफआईआर निराधार है। जुलूस में जिस ध्वज का प्रयोग किया गया वह राष्ट्रीय ध्वज नहीं था। दावा किया कि पुलिस ने बदनियती से मामला दर्ज किया है। जबकि, विवेचना के दौरान तिरंगे के प्रति शरारत के सुबूत नहीं मिले। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
कहा कि राष्ट्रीय ध्वज के प्रति किसी भी तरह का अनादर गंभीर सामाजिक और सांस्कृतिक दुष्परिणाम पैदा कर सकता है, खासकर भारत के विविधतापूर्ण समाज में। ऐसी घटनाओं का इस्तेमाल समुदायों के बीच सांप्रदायिक कलह या गलतफहमियां पैदा करने के लिए किया जा सकता है। राष्ट्रीय ध्वज पर कुरान की आयतें अंकित करना भारतीय ध्वज संहिता, 2002 और राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 का उल्लंघन है।