याची के अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव ने कहा कि प्रयागराज विकास प्राधिकरण शहरी क्षेत्र में स्थित अवैध निर्माण के नाम पर बगैर नोटिस और विधिक कार्रवाई अपनाए नक्शे के नाम पर 5000 मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई कर रहा है।
प्रयागराज विकास प्राधिकरण की ओर से शहर में चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जिनके मकान टूट रहे हैं, वे खुद याचिका दाखिल करें। जनहित याचिका के माध्यम से इस मामले का निस्तारण नहीं किया जाएगा। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश कुमार बिंदल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया।
विज्ञापन
कोर्ट केे इस आदेश के बाद जनहित याचिका वापस ले ली गई। इसके पहले कोर्ट ने मामले की सुनवाई की। याची के अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव ने कहा कि प्रयागराज विकास प्राधिकरण शहरी क्षेत्र में स्थित अवैध निर्माण के नाम पर बगैर नोटिस और विधिक कार्रवाई अपनाए नक्शे के नाम पर 5000 मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई कर रहा है।
कहा कि यह कार्रवाई पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट, यूपी अर्बन एवं प्लॉनिंग डेवलपमेंट एक्ट और उत्तरप्रदेश रेगुलेशन बिल्डिंग ऑपरेशन एक्ट 1958 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। लेकिन, कोर्ट ने इसे नहीं माना और कहा कि जिनके मकान टूट रहे हैं, उन्हें केस दाखिल करना होगा।