विशेषज्ञ के निर्णय की नहीं कर सकते न्यायिक समीक्षा
कोर्ट ने कहा कि न्यायालयों कोउम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन या जांच करने का निर्देश नहीं देना चाहिए, क्योंकि इस मामले में उनकी कोई विशेषज्ञता नहीं है। यह भी कहा कि अकादमिक मामलों को शिक्षाविदों पर छोड़ दिया जाए, न्यायिक समीक्षा की कोई गुंजाइश नहीं है। मामले में पुनर्मूल्यांकन के लिए निर्देश देकर अपने अधिकार क्षेत्र को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए, क्योंकि विशेषज्ञ के निर्णय की न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती है। ऐसे मामलों में न्यायालयों को दखल भी नहीं देना चाहिए। कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।