फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने कहा : बच्चे से मुलाकात के लिए जाएं परिवार न्यायालय, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य नहीं

Fri, 26 Apr 2024 04:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

पति-पत्नी के बीच विवाद के दौरान बच्चे से मुलाकात के लिए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में याची की ओर से अधिवक्ता हेमलता श्रीवास्तव तथा शासकीय अधिवक्ता सौरभ कुमार पांडेय ने पक्ष रखा। मामले में आजमगढ़ के मिथिलेश मौर्या की पत्नी 19 अगस्त18 से उनसे अलग रह रही हैं। बेटी मां के साथ रहती है।
विज्ञापन
अदालत। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट का कहना है कि परिवार न्यायालय में मामला लंबित होने के दौरान बच्चे से मुलाकात के अधिकार के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। न्यायमूर्ति डॉ.योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट ने कहा, बच्चे से मुलाकात के लिए परिवार न्यायालय में उचित आवेदन दिया जा सकता है।

विज्ञापन


पति-पत्नी के बीच विवाद के दौरान बच्चे से मुलाकात के लिए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में याची की ओर से अधिवक्ता हेमलता श्रीवास्तव तथा शासकीय अधिवक्ता सौरभ कुमार पांडेय ने पक्ष रखा। मामले में आजमगढ़ के मिथिलेश मौर्या की पत्नी 19 अगस्त18 से उनसे अलग रह रही हैं। बेटी मां के साथ रहती है।

पति और पत्नी के बीच तलाक की कार्रवाई पारिवारिक न्यायालय के समक्ष लंबित है। याची के वकील ने कहा, याची मुलाकात का अधिकार चाहता है। वहीं, प्रतिवादी के वकील ने कहा, दोनों पक्षों के बीच परिवार न्यायालय में मुकदमा लंबित है। ऐसे में वर्तमान याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें