मामले में चंद्रशेखर ने भारतीय खाद्य निगम में तीन युवकों की नौकरी लगवाने के नाम पर पर उनके परिजनों से रुपये लिए। इसके बाद मोबाइल पर फर्जी नियुक्ति पत्र भी भेज दिया। युवकों को नियुक्ति के लिए छपरा (बिहार) ले जाया गया। जहां निजी कमरे में 25 दिनों तक युवकों को रखा गया। इसके बाद चंद्रशेखर प्रसाद ने युवकों को बताया कि वे अपने आवास पर जाएं और नियुक्ति का सत्यापन होते ही उन्हें इसकी सूचना दे दी जाएगी।
इसके बाद से युवकों को विभाग में न नियुक्त किया गया है और न ही रुपये वापस किए गए। इस मामले में चंद्रशेखर, पंकज कुमार राजभर और अभिषेक कुमार पर थाना भटनी, देवरिया में धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कराया गया था। चंद्रशेखर ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में आवेदन किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत देने पर आवेदक सबूतों के साथ छेड़छाड़, गवाहों को प्रभावित करने के साथ ही दोबारा अपराध कर सकता है। कोर्ट ने जमानत आवेदन को अस्वीकार कर दिया।