बिजली चोरी के मामले में बना इलेक्ट्रिसिटी एक्ट एक विशेष कानून है। इसके तहत अपर सत्र न्यायाधीश (एडीजे) रैंक के अधिकारी को बिजली चोरी से संबंधित मामलों को सुनने का अधिकार है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्र ने गुलफाम की याचिका पर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली चोरी के आरोप में विशेष अदालत अपर सत्र न्यायाधीश गाजियाबाद द्वारा जारी सम्मन वैध है। यह क्षेत्राधिकार से बाहर नहीं है। विशेष कानून सामान्य कानून पर प्रभावी होगा। याचिका में यह कहते हुए चार्जशीट और सम्मन को चुनौती दी गई थी कि बिना केस कमिट हुए बिजली चोरी मामले में सीधे सुनवाई करने का अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि इलेक्ट्रीसिटी एक्ट में जिला जज रैंक के जज की विशेष अदालत को बिजली चोरी मामले सुनने का अधिकार है। कोर्ट ने बिजली चोरी मामले में विशेष अदालत के आदेश की कार्यवाही को रद्द करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है।
मामले में जूनियर इंजीनियर उमेश कुमार गुप्ता ने थाना एंटी पावर थेफ्ट गाजियाबाद में 28 दिसंबर 2020 को बिजली चोरी के आरोप में दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई और विशेष अदालत ने सम्मन जारी किया। याची का कहना था कि निष्पक्ष जांच नहीं की गई।