वादी के अधिवक्ता सैयद काशिफ अब्बास रिजवी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले का पुरजोर समर्थन किया। दलील दी कि अभियुक्तों ने सुनियोजित साजिश के तहत अधिकारी और उनकी पत्नी की निर्मम हत्या की। यह एक दुर्लभतम मामला है। क्योंकि, अपराध की प्रकृति बेहद जघन्य है। उन्होंने खंडपीठ से ट्रायल कोर्ट के मृत्युदंड के फैसले की पुष्टि करने की मांग की।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति हरवीर सिंह ने ट्रायल कोर्ट के दोषसिद्धि को सही ठहराया पर मृत्युदंड की सजा कम करके आजीवन कारावास में बदल दी। वहीं, न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता ने अभियुक्त रैयान को बरी करने का मत व्यक्त किया। ऐसे में दोनों जजों की अलग-अलग राय होने से मामले को अंतिम सुनवाई और निर्णय के लिए मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया गया है।