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High Court : कर्मचारी का बार- बार तबादला उत्पीड़न, ट्रांसफर आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द

Thu, 30 Apr 2026 01:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद लंबे समय तक बिना आरोप पत्र के किसी कर्मचारी का बार-बार तबादला करना उत्पीड़न का मामला है। इसे अदालत बर्दाश्त नहीं कर सकती।
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अदालत। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद लंबे समय तक बिना आरोप पत्र के किसी कर्मचारी का बार-बार तबादला करना उत्पीड़न का मामला है। इसे अदालत बर्दाश्त नहीं कर सकती।

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इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन झांसी के बरुआ सागर में तैनात रहे याची रजनीश कुमार के पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में तबादले के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने उन्हें मूल स्थान झांसी में ही तैनाती देने का आदेश दिया है। यह भी स्पष्ट किया कि तीन हफ्ते के भीतर याची को आरोप पत्र देकर अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू नहीं होती तो माना जाएगा कि विभाग ने उनके खिलाफ लंबित कार्यवाही को बंद कर दिया है।

याची के अधिवक्ता प्रणेश कुमार मिश्रा ने दलील दी कि याची को 15 सितंबर 2025 को निलंबित किया गया था, जिसे फरवरी 2026 में बहाल कर दिया गया। विभाग ने अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने या आरोप पत्र देने के बजाय उसे एक सर्कुलर की आड़ में पहले लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध किया। फिर पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में तबादला कर दिया।
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कोर्ट ने माना कि यह तबादला प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि विभागीय जांच प्रक्रिया अपनाए बिना दी गई एक सजा है। वह भी तब जब हाईकोर्ट के दो स्पष्ट आदेश के बावजूद विभाग ने अब तक जांच शुरू नहीं की है।

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