कोर्ट ने एसआईटी की विवेचना पर संतोष जताते हुए कहा कि जांच सही दिशा में बढ़ रही है। पीड़िता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रविकिरन जैन ने अर्जी देकर गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की। दूसरी प्रार्थना मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए गए 164 के बयान को लेकर की गई।
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वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि बयान के दौरान एक तीसरी महिला भी वहां मौजूद थी जो लगातार अपने मोबाइल के की पैड पर कुछ कर रही थी। दूसरे मजिस्ट्रेट ने पीड़िता से उसके बयान के हर पेज पर हस्ताक्षर नहीं करवाए हैं। उसे बयान ठीक से पढ़ने नहीं दिया गया और मजिस्ट्रेट ने दस्तखत करा लिए। पीड़िता का बयान फिर से दर्ज कराने की अनुमति दी जाए।
पीठ ने कहा कि याची के अधिवक्ता ऐसा कोई तथ्य नहीं दे सके, जिससे कहा जा सके कि मजिस्ट्रेट ने बयान दर्ज करने में प्रक्रिया का पालन नहीं किया। बयान की के दौरान महिला की मौजूदगी पीड़िता को सहज और सुरक्षित महसूस कराने के लिए भी हो सकती है। जहां तक बयान के हर पेज पर हस्ताक्षर की बात है ऐसा कोई नियम नहीं है कि हर पेज पर हस्ताक्षर कराना अनिवार्य है। बयान पढ़कर सुनाए जाने का नियम है न कि पढ़ने के लिए देने का। कोर्ट ने कहा इससे किसी प्रक्रिया के उल्लंघन का पता नहीं चलता है।
एसआईटी के आईजी नवीन अरोड़ा ने बताया कि आरोपी चिन्मयानंद को गिरफ्तार किया जा चुका है। चिन्मयानंद से पांच करोड़ रुपये मांगने के आरोपी पीड़िता के साथी संजय और अन्य अभियुक्तों की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। संजय ने चिन्मयानंद के मोबाइल पर व्हाट्सएप मैसेज किया था, जिसका स्क्रीन शॉट उन्होंने अपने वकील को भेजा। वकील की शिकायत पर पीड़िता और उसके साथियों पर रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज किया गया है।
प्रदेश सरकार के वकील ने कोर्ट से मांग की कि मामले की सुनवाई चैंबर में की जाए, क्योंकि पीड़िता की पहचान और जांच की बहुत सी गोपनीय बातों को सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। स्वामी चिन्मयानन्द के वकील दिलीप कुमार ने इस पर आपत्ति की, उन्होंने कहा एसआईटी तो प्रेस कांफ्रेंस करके जानकारी दे रही है। इस मामले में गोपनीयता की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने चैंबर में सुनवाई की मांग नहीं मानी।
अदालत को जानकारी दी गई कि पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। उसे एक महिला आरक्षी और एक गनर और परिवार को तीन गनर दिए गए हैं। सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसके परिवार के लोग भी अदालत में मौजूद थे। जैसे ही कोर्ट ने उसकी अर्जी नामंजूर की, सभी लोग अदालत से बाहर चले गए।