एसटीएफ को दिया निर्देश
कोर्ट ने कहा कि एसएफआईओ की शिकायत और वर्तमान एफआईआर को साथ पढ़ने पर दोनों में समान कंपनियां और कथित कार्यप्रणाली सामने आती है। कोर्ट ने कहा कि यदि एसटीएफ समान कॉरपोरेट नेटवर्क की अलग जांच जारी रखती है तो एक ही कथित धोखाधड़ी की समानांतर और खंडित जांच होगी।
कोर्ट ने कहा कंपनियां अधिनियम, 2013 के तहत जब केंद्र सरकार किसी मामले की जांच एसएफआईओ को सौंप देती है तो उसी विषय पर अन्य जांच एजेंसी आगे जांच नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि एसएफआईओ का अधिकार क्षेत्र केवल कंपनियां अधिनियम तक सीमित नहीं है। बल्कि सौंपे गए लेनदेन से जुड़े भारतीय दंड संहिता के अपराधों तक भी विस्तृत है।
हालांकि कोर्ट ने कहा कि एसएफआईओ की शिकायत में शिकायतकर्ता के भूखंड से जुड़े लेनदेन की अलग से जांच नहीं की गई है। इसलिए शिकायतकर्ता के अधिकारों की रक्षा और समानांतर जांच से बचने के लिए एसटीएफ की जांच एसएफआईओ को स्थानांतरित की जाती है।
कोर्ट ने एसटीएफ को निर्देश दिया कि वह केस डायरी और जब्त समस्त सामग्री एसएफआईओ को सौंपे। साथ ही एसएफआईओ को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत आगे की जांच कर आवश्यकता होने पर नई दिल्ली की विशेष अदालत में अनुपूरक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इसके लिए केंद्र सरकार से किसी नए अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।