शिकायतकर्ता आर.सथेश शंकर ने एक कंपनी पर जबरन नौकरी से निकालने, पीएफ व बकाया राशि मांगने पर निदेशक द्वारा दुर्व्यवहार करने और धमकी देने सहित अन्य मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। इसपर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्ध नगर ने कंपनी के निदेशक को समन जारी किया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से जारी समन पर रोक लगाने और मुकदमे की प्रक्रिया रद्द करने की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आवेदक के वकील ने ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया, जिस आधार पर कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करे। यह फैसला मयंक कुमार जैन की कोर्ट ने सुनाया।
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शिकायतकर्ता आर.सथेश शंकर ने एक कंपनी पर जबरन नौकरी से निकालने, पीएफ व बकाया राशि मांगने पर निदेशक द्वारा दुर्व्यवहार करने और धमकी देने सहित अन्य मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। इसपर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्ध नगर ने कंपनी के निदेशक को समन जारी किया। इसके विरोध में कंपनी के निदेशक ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाद दायर कर समन और लंबित मुकदमे की प्रक्रिया रद्द करने की मांग की।
निदेशक के वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता ने प्रतिद्वंदी कंपनी ज्वाइन कर ली और गोपनीय बातें प्रतिद्वंदी कंपनी को बताकर नुकसान कराया। इसके साथ ही अन्य कई आरोप लगाए। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए वाद खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि निदेशक के अधिवक्ता कोई ऐसा साक्ष्य नहीं दे पाए जिस पर हाईकोर्ट हस्तक्षेप करे।