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High Court : ग्राम प्रधान के छीने अधिकार पर रोक से इन्कार, मजदूरी भुगतान में हेराफेरी के मामला

Mon, 19 Jan 2026 06:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में अलीगढ़ की ग्राम पंचायत सुनामाई की प्रधान कीर्ति शर्मा के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों पर लगाई गई रोक के आदेश पर हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। 
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अदालत। - फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में अलीगढ़ की ग्राम पंचायत सुनामाई की प्रधान कीर्ति शर्मा के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों पर लगाई गई रोक के आदेश पर हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि डीएम का आदेश प्रथम दृष्टया संतुष्टि पर आधारित है। याचिका में हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार नहीं है। डीएम को मामले की जांच एक महीने में पूरी करनी होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार की अदालत ने दिया।

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ग्राम प्रधान कीर्ति शर्मा की ओर से डीम के 17 नवंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी। इसके तहत उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 95(1)(ग) के अंतर्गत उनकी सभी शक्तियां समाप्त कर दी गई थीं। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके विरुद्ध की गई शिकायतें हलफनामों से समर्थित नहीं थीं। लगाए गए 14 आरोपों में से 11 सिद्ध नहीं हुए। शेष तीन आरोपों में भी संबंधित श्रमिकों ने कार्य करने और मजदूरी प्राप्त करने का हलफनामा दाखिल किया है। डीएम की संतुष्टि प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण है।

वहीं राज्य सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता ने याचिका का विरोध किया। कहा कि प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने पर औपचारिक जांच का आदेश विधिसंगत है। कोर्ट ने पाया कि याची की ओर से एक ऐसे व्यक्ति को मजदूरी का भुगतान किया गया, जो ग्राम पंचायत को सामग्री आपूर्ति करने वाली फर्म का स्वामी है। कोर्ट ने कहा यह तथ्य संदेह उत्पन्न करता है। मामले में विस्तृत जांच आवश्यक है।

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