इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में समन जारी करने के तौर-तरीकों पर तल्ख टिप्पणी की है। कहा कि समन जारी करने में लापरवाही न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 की आत्मा के विपरीत है।
इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की अदालत ने अलीगढ़ के राजन बजाज के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में जारी वारंट पर रोक लगा दिया। कोर्ट ने पाया कि पुलिस जांच में निर्दोष पाए जाने के बावजूद विशेष अदालत ने प्रोटेस्ट पिटीशन के आधार पर याची को 30 अप्रैल 2024 को समन जारी कर दिया।
कोर्ट के अनुसार एससी-एसटी एक्ट की ऐसी धारा में समन जारी किया गया, जो कानून में अस्तित्व ही नहीं रखती। यह भी रेखांकित किया कि क्षेत्राधिकार से बाहर के आरोपी के मामले में न तो स्वयं जांच की गई और न ही पुलिस से जांच कराई गई। अदालत ने इसे गंभीर न्यायिक चूक बताया और वर्तमान और तत्कालीन विशेष न्यायाधीश से 30 जनवरी 2026 तक लिखित स्पष्टीकरण तलब किया है। अगली सुनवाई तक आरोपी के खिलाफ जारी सभी वारंट पर रोक लगा दी है।