इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों से गलत वेतन निर्धारण के आधार पर की गई वसूली को अवैध ठहराते हुए अधिशासी अभियंता के आदेश को रद्द कर दिया है। कहा है कि याचियों के परिलाभों से काटी गई रकम एक माह के भीतर वापस की जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों से गलत वेतन निर्धारण के आधार पर की गई वसूली को अवैध ठहराते हुए अधिशासी अभियंता के आदेश को रद्द कर दिया है। कहा है कि याचियों के परिलाभों से काटी गई रकम एक माह के भीतर वापस की जाए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि तय समय में भुगतान न होने पर 70 प्रतिशत ब्याज के साथ राशि लौटानी होगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने सतीष कुमार और किरणपाल सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए दिया। कोर्ट ने बुलंदशहर मध्य गंगा नहर निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता की ओर से 16 जनवरी 2026 को पारित उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत याचियों के देय से क्रमशः 8,29,890 रुपये और 12,57,370 रुपये की कटौती की गई थी।
याचियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि अधिक भुगतान विभाग की ओर से गलत वेतन निर्धारण का परिणाम था। इसमें याचियों की कोई भूमिका नहीं थी। ऐसे में विभाग अपनी गलती का दंड कर्मचारियों पर नहीं डाल सकता। कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद इस प्रकार की वसूली सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह मामले के निर्णय के विपरीत है।
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हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को यह छूट दी है कि यदि यह पाया जाता है कि याचियों ने किसी प्रकार की गलत जानकारी देकर लाभ प्राप्त किया है तो वह दो माह में आदेश को वापस लेने के लिए आवेदन कर सकती है।