इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के एक प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक के निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही मामले में दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का आदेश दिया है। अधिकारियों को एक सप्ताह में चार्जशीट उपलब्ध कराने और प्रधानाध्यापक को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने राकेश तिवारी की याचिका पर दिया है। मामला मिड-डे मील के लिए लकड़ी के चूल्हे के उपयोग और इस संबंध में मीडिया में कथित बयानबाजी के आरोप से जुड़ा है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने 19 मार्च 2026 को एक आदेश पारित कर प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया था। विभाग का आरोप था कि दो गैस सिलिंडर उपलब्ध होने के बावजूद स्कूल में खाना लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जा रहा था, जो सरकारी नियमों के विरुद्ध है। याची ने निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची के अधिवक्ता सरोज यादव ने दलील दी कि प्रधानाध्यापक ने मीडिया को ऐसा कोई बयान नहीं दिया था, जिससे विभाग की छवि खराब हो।
गैस की किल्लत के कारण लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेना पड़ा था। निलंबन का यह आदेश ‘उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999’ के नियम 4 का उल्लंघन है। क्योंकि, लगाए गए आरोप इतने गंभीर नहीं हैं कि उनके लिए निलंबन जैसा कदम उठाया जाए। बीएसए के वकील ने स्वीकार किया कि गैस सिलिंडर की कमी की स्थिति थी, जिसके कारण याचिकाकर्ता के पास लकड़ी का उपयोग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि जब तक मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक 19 मार्च के निलंबन आदेश का प्रभाव और संचालन स्थगित रहेगा।