इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि दुष्कर्म न केवल पीड़िता के विरूद्ध अपराध है, बल्कि यह पूरे समाज के खिलाफ अपराध है। जीवन के मूल अधिकारों का हनन है। यदि कार्रवाई नहीं की गई तो लोगों का न्याय तंत्र से भरोसा उठ जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने गोरखपुर बांसगांव निवासी आरोपित चंद्र प्रकाश शर्मा की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया है।
पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि इससे असहाय बच्ची की आत्मा को ठेस पहुंचती है। ट्रायल पूरा होने से पहले आरोपित की निर्दोषिता का निर्णय नहीं किया जा सकता। आठ साल की बच्ची दुष्कर्म और उसके दुष्परिणाम नहीं जानती। हाईकोर्ट ने कहा कि 12 वर्ष से छोटी बच्ची से दुष्कर्म में 20 वर्ष की कारावास बढ़कर उम्रकैद हो सकती है। साथ ही जुर्माना लगाया जा सकता है। ऐसे में ट्रायल से पहले आरोपित को निर्दोष नहीं माना जा सकता।