कोर्ट ने सुनवाई के दौरान निचली अदालत का फैसला सही पाया। कहा कि निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि दोषी सजा काटने के लिए संबंधित निचली अदालत में 15 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 34 साल पूर्व के मामले में रेप के आरोपी की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने याची को 15 दिनों के भीतर निचली अदालत में समर्पण करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार चतुर्थ ने मुस्तकीम की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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कोर्ट ने सुनवाई के दौरान निचली अदालत का फैसला सही पाया। कहा कि निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि दोषी सजा काटने के लिए संबंधित निचली अदालत में 15 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करे। इसके साथ ही कोर्ट ने याची के अधिवक्ता को न्यायमित्र के रूप में काम करने के लिए 10 हजार रुपये प्रदान करने का आदेश दिया।
याची पर शाहजहांपुर जिले के सदर बाजार पुलिस स्टेशन के अंतर्गत 12 अगस्त 1987 को नौ साल की बच्ची के साथ रेप करने की एफआईआर दर्ज हुई थी। मामले में निचली अदालत ने 13 फरवरी 1990 को चार साल की कैद और पांच सौ रुपये की सजा सुनाई थी। याची ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने याची के अधिवक्ता को सुनने के बाद निचली अदालत के फैसले को सही पाते हुए याचिका को खारिज कर दी।