यह है मामला
2007 में तलाक के बाद याची की पूर्व पत्नी ने नाबालिग बेटे के लिए भरण-पोषण का दावा परिवार न्यायालय में दाखिल किया। कोर्ट ने फरवरी 2019 में पति को आयकर रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट, एफडी, बॉन्ड और वेतन पर्ची सहित पूर्ण आर्थिक ब्योरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। पत्नी ने आरोप लगाया कि पति ने 2011–2014 के आईसीआईसीआई बैंक खाते का जो ब्योरा पेश किया, वह न तो प्रमाणित था और न ही उस पर बैंक की मुहर या हस्ताक्षर थे। विवेचना में पता चला कि अदालत में दाखिल दस्तावेज से कई एंट्री जानबूझकर हटाई गई थीं, ताकि वास्तविक आय छिपाई जा सके। इस आधार पर याची के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और विवेचना के बाद पुलिस ने सितंबर 2019 में आरोप पत्र दाखिल किया था। इस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए याची के खिलाफ समन आदेश जारी किया।