इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के मामले में जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान पाया कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) से विसरा रिपोर्ट देर से दी जा रही है। ऐसे में आरोप पत्र बिना विसरा रिपोर्ट के ही दाखिल किए जा रहे हैं। इस पर कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशक और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि विसरा रिपोर्ट जांच अधिकारी को समय पर मिले, ताकि मामले की प्रभावी जांच हो सके।
यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने फर्रुखाबाद के रामरतन की ओर से दाखिल जमानत अर्जी खारिज करते हुए दिया। मोहम्मदाबाद थाने में 16 फरवरी 2024 को अटल बिहारी ने रामरतन व अन्य पर मुकदमा दर्ज कराया था। कहा था कि उसकी बहन प्रेमलता की शादी 14 जनवरी 2020 में रामरतन से हुई थी। आरोप लगाया था कि दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर बहन को पहले जहरीला पदार्थ दिया गया और बाद में उसे फंदे से लटका दिया गया।
इससे उसकी मौत हुई। वहीं, रामरतन ने हाईकोर्ट में जमानत को अर्जी दाखिल की। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि रामरतन को झूठा फंसाया गया है। बिना विसरा रिपोर्ट के आरोप पत्र जमा कर दिया गया। जबकि कोर्ट की दूसरी बेंच ने आदेश दिया था कि बिना विसरा रिपोर्ट के कोई आरोप पत्र दाखिल नहीं किया जाना चाहिए। इस संबंध में डीजीपी ने सर्कुलर भी जारी किया था। 17 अगस्त 2024 से आरोपी जेल में है। कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। ऐसे में वह जमानत का हकदार है।
अपर शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि विसरा रिपोर्ट में कीटनाशक पाया गया है। विसरा रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है। कोर्ट ने कहा कि विवाहिता की अप्राकृतिक मौत शादी के सात साल के भीतर हुई है। जिन सह आरोपियों को जमानत मिली है, वे मृतका के ससुर व सास हैं। याची मृतक का पति है। इसका मामला सह आरोपियों से भिन्न है। इन तथ्यों के आधार पर जमानत अर्जी खारिज कर दी। साथ ही विसरा रिपोर्ट के संबंध में डीजीपी व प्रमुख सचिव को दिशानिर्देश जारी किया।